Disability Rights | दिव्यांग निधि पर मनपा प्रशासन सवालों के घेरे में

Mahawani
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Group of disability rights activists standing outside a municipal office building in an Indian city, including a woman using crutches, highlighting civic action and accessibility issues.

पाच प्रतिशत बजट के पारदर्शी वितरण की उठी मांग; दिव्यांग हक्क संघर्ष समिति ने आयुक्त व महापौर को सौंपा ज्ञापन

Disability Rightsचंद्रपुर | शहर में दिव्यांग अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर एक बार फिर स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दिव्यांग हक्क संघर्ष समिति ने बुधवार (दि. १२) को चंद्रपुर महानगरपालिका के आयुक्त तथा महापौर से प्रत्यक्ष मुलाकात कर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए दिव्यांग नागरिकों के लिए निर्धारित ५ प्रतिशत विशेष निधि के पारदर्शी और त्वरित वितरण की मांग की। समिति ने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से इस निधि का लाभ शहर के दिव्यांग नागरिकों तक अपेक्षित रूप से नहीं पहुंच पाया है, जिसके कारण बड़ी संख्या में पात्र लाभार्थी अब भी योजनाओं से वंचित हैं।

Disability Rights

समिति के अध्यक्ष और दिव्यांग नेता आसीफ हुसैन शेख के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल ने मनपा प्रशासन के समक्ष यह गंभीर मुद्दा उठाया कि वर्ष २०१८–१९ से लेकर २०२६ तक के बजट कालखंड में दिव्यांगों के लिए निर्धारित ५ प्रतिशत निधि के उपयोग और वितरण को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। उनका कहना था कि इस अवधि में नगर निगम के बजट में दिव्यांग कल्याण के लिए प्रावधान तो किया गया, लेकिन इसका वास्तविक लाभ दिव्यांग नागरिकों तक कितनी मात्रा में पहुंचा, इस संबंध में पारदर्शिता का अभाव दिखाई देता है। इसी कारण दिव्यांग समुदाय के भीतर असंतोष और भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।

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ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि दिव्यांगों के लिए निर्धारित योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी का पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं किया गया। प्रशासनिक स्तर पर सूचना के अभाव के कारण अनेक दिव्यांग नागरिक इन योजनाओं के बारे में जान ही नहीं पाए, जबकि वे इन सुविधाओं के लिए पात्र थे। समिति का कहना है कि योजनाओं की जानकारी का अभाव भी एक बड़ी समस्या है, क्योंकि इससे दिव्यांग समुदाय के अधिकारों का वास्तविक लाभ सीमित दायरे तक ही सिमट जाता है।

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समिति के प्रतिनिधियों ने बताया कि स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के बजट में दिव्यांग नागरिकों के पुनर्वास, स्वरोजगार, सहायक उपकरण, शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष निधि का प्रावधान किया जाता है। इस निधि का उद्देश्य यह है कि दिव्यांग नागरिक आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बन सकें तथा उन्हें जीवन की मुख्यधारा में समान अवसर प्राप्त हो। लेकिन चंद्रपुर में इस निधि के उपयोग को लेकर स्पष्टता नहीं होने से यह उद्देश्य अधूरा दिखाई देता है।

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आसीफ हुसैन शेख ने कहा कि दिव्यांग नागरिकों के अधिकार केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पिछले कई वर्षों की लंबित ५ प्रतिशत दिव्यांग निधि का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए और पात्र लाभार्थियों को उसका लाभ जल्द से जल्द उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में इस निधि के उपयोग के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सहायता वास्तव में जरूरतमंद दिव्यांग नागरिकों तक पहुंचे।

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समिति ने प्रशासन से यह भी मांग की कि दिव्यांग कल्याण से संबंधित योजनाओं और लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक की जाए और नगर स्तर पर व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाए। इससे दिव्यांग समुदाय को यह जानकारी मिल सकेगी कि उनके लिए कौन-कौन सी योजनाएं उपलब्ध हैं और वे उनका लाभ किस प्रकार प्राप्त कर सकते हैं। समिति का मानना है कि सूचना की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही ही दिव्यांग नागरिकों के अधिकारों की वास्तविक रक्षा कर सकती है।

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ज्ञापन सौंपते समय समिति के प्रतिनिधिमंडल में एडवोकेट तबस्सुम शेख, ममता नक्सिने, कल्पना ताई शिंदे, नितिन भाऊ खोबरागड़े तथा विवेक पिंपडे भी उपस्थित थे। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मनपा प्रशासन से आग्रह किया कि इस मुद्दे को केवल एक औपचारिक शिकायत के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसे दिव्यांग समुदाय के सामाजिक और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े गंभीर विषय के रूप में लिया जाए।

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समिति के सदस्यों ने यह भी उम्मीद जताई कि चंद्रपुर महानगरपालिका प्रशासन इस विषय की गंभीरता को समझते हुए आवश्यक कदम उठाएगा और दिव्यांग नागरिकों के लिए निर्धारित निधि के उपयोग को पारदर्शी बनाएगा। उनका कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते इस मुद्दे पर ठोस कार्रवाई करता है, तो इससे न केवल दिव्यांग समुदाय का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही और संवेदनशीलता भी सामने आएगी।

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दिव्यांग हक्क संघर्ष समिति ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि निधि के वितरण और उससे संबंधित जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया गया तथा पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं हुई, तो भविष्य में इस मुद्दे को लेकर व्यापक जनआंदोलन भी किया जा सकता है। समिति का कहना है कि दिव्यांग नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से संघर्ष करना उनकी जिम्मेदारी है और यदि आवश्यकता पड़ी तो वे इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।

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शहर में दिव्यांग नागरिकों की संख्या को देखते हुए यह मुद्दा केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय और समान अवसर के सिद्धांतों से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मनपा प्रशासन इस ज्ञापन के बाद दिव्यांगों के अधिकारों से जुड़े इस संवेदनशील प्रश्न पर किस प्रकार की ठोस कार्रवाई करता है।


Why did the Divyang Hakk Sangharsh Committee submit a memorandum to the Chandrapur Municipal Corporation?
The committee demanded transparency and proper distribution of the 5% disability welfare fund meant for disabled citizens.
What is the 5% disability fund in municipal budgets?
It is a special provision in local government budgets allocated for welfare schemes, rehabilitation, assistive devices, and empowerment of disabled citizens.
What issues were raised by the activists regarding the fund?
Activists alleged that from 2018–19 to 2026 the fund was not properly distributed and information about related schemes was not widely communicated to eligible beneficiaries.
What warning did the committee give to the administration?
The committee warned that if transparency and distribution of the disability fund are not ensured, they may launch a larger public movement to demand justice for disabled citizens.


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